तेलुगू सिनेमा किसे कहते हैं , पहली तेलुगू फिल्म कौनसी है नाम क्या है , Telugu cinema in hindi

तेलुगू सिनेमा किसे कहते हैं , पहली तेलुगू फिल्म कौनसी है नाम क्या है , Telugu cinema in hindi

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Telugu cinema in hindi तेलुगू सिनेमा किसे कहते हैं , पहली तेलुगू फिल्म कौनसी है नाम क्या है ?

तेलुगू सिनेमा
1932 में पहली तेलुगू फिल्म एच.एमण् रेड्डी द्वारा निर्मित भक्त प्रहलाद थी। इसने परदे पर पौराणिक या अयथार्थ ट्रेंड को शुरू किया जो मंच प्रस्तुति पर आधारित थे चुन्नीभाई देसाई की पडक्कू पट्टभिसेकम और शंकुतला, ईस्ट इ.िडया फिल्म कंपनी की रामादासू और सती सावित्री ने मंच कलाकारों को जुड़ते देखा (सी.एस.आर. अजनेयुलू, कनम्बा, बेल्लारी राघव और अन्य)।
1930 के दशक ने सी. पुल्लैया, चित्रपू नरसिम्हा राव और कोचरलकोटा रंगधम्म राव जैसे मशहूर निर्देशकों को देखा। 1930 के तेलुगू सिनेमा के प्रसिद्ध नामों में पी.वी. दास, जिन्होंने 1934 में मद्रास एवं गुंडी में वेल पिक्चर्स स्टूडियो की शुरुआत की; के. रामनाथ, ए.के. शेखर और टी.एस. मुथ्थुस्वामी जिन्होंने तमिल फिल्म सीता कल्यालणम का तेलुगू संस्करण बनाया; पी. कन्नमभा और देसारी कोटिरतनम (1935); और एच.एमण् रेड्डी, जिन्होंने सफल फिल्म गृहलक्ष्मी बनाई (1937)। वे फिल्म जो इस विषय पर आधारित थीं, उनमें सुमंगली (बी. एन. रेड्डी), मालसिला और रेतू बिडा (गुडाबल्ली रामब्राह्मण) शामिल हैं।
अक्कीनेनी नागेश्वरा राव और एन.टी. रामाराव ने तेलुगू सिनेमा पर दो दशकों से भी अधिक समय तक राज किया। बी.एन. रेड्डी वंदेमातरम, सुमंगली, देवता, स्वग्रसीमा, मालीस्वरी और बंगारू पापा जैसी फिल्मों का निर्देशन कर प्रसिद्ध निर्देशक के तौर पर उदित हुए। एल.वी. प्रसाद की संसारम ने सामाजिक ट्रेंड को स्थापित किया जो 1950 के दशक तक हावी रहा। के.वी. रेड्डी, ए. सुब्बा राव, टी. प्रकाश राव, कमलकारा कामेश्वरा राव और तापी चाणक्य (जिनकी फिल्म रोजुलू मारई ने कीर्तिमान स्थापित कि,) जैसे निर्देशक इस क्षेत्र में पेशेवराना सोच लेकर आए।
1960 और 1970 के उत्तरार्द्ध के दशकों ने शोभन बाबू और कृष्णा जैसे कलाकारों को देखा। इस समय के प्रमुख फिल्म निर्माता थे टी. प्रकाश राव (ईल्लारीकम), ए. शुभा राव (मंची मनासुलू, मारो प्रपंचम, मूगा मनुसूलू), बापू (मुथथला मुग्गू, सीता कल्याणम, मनावुरू पंडावुलू ), के राघवेंद्र राव (अडावी रामूडू ), के. विश्वनाथ (सीता महालक्ष्मी, प्रेसीडेंट पेरम्मा), वी.वी. राजेंद्र प्रसाद (दसारा बोलुडू), के कामेश्वरा राव (नर्थन साला), चैधरी प्रकाश राव (वीरंगजनेय, यशोदा कृष्ण), पी. धूंधी (बदाचारी 116), के. बालाचंदर (मारो चरिता), टी. रामराव (यम गोला), दसारी नारायण राव (तथा.मनामुडू ), यू. विश्वेश्वरा राव (नग्न सथयम), और विट्टालचार्या।
1980 के दशक की के. विश्वनाथ की सुपरहिट फिल्म, शंकर भरणम, ने नए माग्र खोले। उन्होंने शपताप्दी और सामरा संगमम भी बनाई। जंधालया (आनंदा भैरवी, श्रीवरिकी, प्रेमा लेखा) और वेसमी (सितारा, अन्वेषण) प्रसिद्ध निर्देशक थे।
1990 के दशक ने तेलुगू सिनेमा में महत्वपूर्ण फिल्म-निर्माताओं एवं फिल्मों का दौर देखा, जिनमें प्रमुख हैंः बी. नरसिंगा राव की दासी और मती मुनुसूलू, के. विश्वनाथ की स्वाथी ग्रियानम और शुभा संकल्पम, देसारी की सुरीगडू और कृष्ण वामसी की अंतपुरम।
1990 के दशक से कुछ अभिनेता एवं अभिनेत्रियां तेलुगू सिनेमा पर राज कर रहे हैं जिनमें चिरंजीवी, नागार्जुन, बालकृष्ण, वेंकटेश, चक्रवर्थी, मोहन बाबू, सुमन, तरुण, विजया शांति, सौंदर्या, आमिनी, रंभा, लैला, अर्चना, मीना, असिन और मीरा जैसमिन हैं। महत्वपूर्ण निर्देशक हैं के.एन.टी. शैस्ट्री (थिलादनम) निलाकांता (शो), मोहन कृष्णा इंद्र गंती (गृहनम), के. विश्वनाथ (स्वरभिषेकम), चंद्रशेखर येलेटी (ऐथी) और के. विजया भास्कर (नुवे कवाली)।
अन्य प्रा्रादेशिक फिल्म उद्योग
कोंकणी सिनेमाः काकंे णी सिनेमा का प्रारंभ जेरी ब्रिगांजा (कोकंणी सिनेमा के पिता) द्वारा निर्मित फिल्म मोसाचो ओन्दो के साथ हुआ। यह 1950 में रिलीज हुई। अन्य फिल्मों में फ्रैंक फर्नांड की अमचेम नोविसब और निर्मोन शामिल हैं। सुखाचेम सपोन ब्रिगंजा द्वारा निर्मित की गई, जिन्होंने स्वयं की एक प्रोडक्शन कंपनी, हेलेन प्राॅडक्शन, खोली। कोंकणी सिनेमा में अन्य प्रमुख फिल्में हैं कोर्तूबांचो सोंसार, जीविन आमचेल ओक्सेम, तीसरी चिट, बोगलांत और महोजी धोरकन।
1980 के दशक से, 30 से अधिक कोंकणी फिल्में वीडियो फिल्म और टेलीफिल्म के तौर पर रिलीज की जा चुकी हैं। मुथू कृष्ण दास द्वारा निर्मित गिरेस्कर और रिचर केटलिनो द्वारा निर्मित बोगसेन्हे विगत दशक की 35 एमएम की दो बड़ी रंगीन फिल्में थीं।
सिंधी सिनेमाः जे.बी.एच. वाडिया, भारतीय फिल्म उद्योग के पथ प्रदर्शक, ने पहली सिंधी फिल्म एकता निर्मित की। 1950 और 1960 के दशक ने सैयद हुसैन अली शाह (उमर मारवी), टी.एमण् बिहारी (अबना), डा. ईश्वरदास अतुलालवानी (राय दयाच), गोपे भगनारी (परदेशी प्रीतम), दीपक आशा (इंसाफ किथे और लाडली), रेलूमल मुलतानबी (झूलेलाल) गोविंद मालही (सिंधु-जे-किनारे) और राजन चावला (होजामालो) जैसे निर्देशकों एवं फिल्म निर्माताओं द्वारा निर्मित फिल्मों का दौर देखा। सिंधी फिल्म निर्माताओं ने हिंदी फिल्में भी बनाईं जिनमें से कुछ फिल्म निर्माता हैं के.एमण् मुलतानी, बुलो सी. रानी, सी. अर्जुन, जीपी. सिप्पी, रमेश सिप्पी, एमण्,न. सिप्पी, एन.सी. सिप्पी, हरि शिवदासनी, साधना नय्यर, बबीता कपूर, राज सिप्पी, शीला रमानी, उदय कुमार, दीपक आशा और लोकसेन लालवानी।
मणिपुरी सिनेमाः मणिपुरी फिल्म बनाने का पहला प्रयास मैनु पेमचा थी जो मणिपुरी लोक कथा पर आधारित थी, हालांकि, ये पूरी नहीं हो सकी। पहली मणिपुरी फिल्म मशहूर बंगाली निर्देशक देबाकी कुमार बोस द्वारा निर्मित मतांगी मणिपुर (1972) थी। पहले मणिपुरी फिल्म निर्देशक एस.एन. चंद थे जिन्होंने 1970 के दशक में ब्रोजेनड्रोगी लुहोंगबा और नगाकण्ई.को नागसे फिल्में बर्नाईं।
इस दशक के अन्य महत्वपूर्ण निर्देशक अरिबाम श्याम शर्मा (लमजा, परासुरम, शपाभी 1976 में और ओलेंगथागी वांगमदासी 1979 में); एमण् नीलामणी सिंह (खोगजेल) और बंका (वांगमा.वांगमा) थे।
अरिबाम की इमेगी निंगथेम (1981) ने सर्वोत्तम मणिपुरी फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। इसने नेंट्स फेस्टिवल, फ्रांस, 1982 में ग्रांट प्रिक्स पुरस्कार भी जीता। रंगीन फिल्में 1982 में आ पायीं। इस दशक के नए निर्देशकों में इबोहल शर्मा (थाबा, 1983) और एमण्ए. सिंह (साना किथेल, 1982) प्रमुख हैं।
इबोहल शर्मा ने 1983 में संबल बांगमा बनाई। इशानोऊ और सनाबी अरिबाम शर्मा द्वारा निर्मित की गईं। ओकेन अमक चेम (रवोनयेंग, मेयोफी गी माचा) और मखोनमनी मोंगसाबा (चटलेडो ईदी) नए फिल्म-निर्माताओं में हैं।
मणिपुरी फिल्म उद्योग के विकास हेतु सरकार द्वारा 1981 में मणिपुर फिल्म विकास परिषद् की स्थापना की गई।

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