कर्मवाच्य, कर्मणि प्रयोग की परिभाषा क्या है passive voice in hindi definition meaning कर्मवाच्य, कर्मणि प्रयोग किसे कहते हैं ?

प्रश्न : कर्मवाच्य, कर्मणि प्रयोग को परिभाषित कीजिये ?

उत्तर : हिंदी में कर्मवाच्य, कर्मणि प्रयोग (passive voice) की परिभाषा निम्नलिखित है –

क्रिया का वह रूप जो यह दर्शाता है कि क्रिया-व्यापार व्यक्ति या वस्तु पर बाहर से लक्षित है । इसमें कर्ता स्वयं क्रिया-व्यापार संपन्न नहीं करता वरन् उस पर दूसरी वस्तु के कार्य का प्रभाव पड़ता है । दूसरे शब्दों में – जिन क्रियाओं की मूल संरचना से कर्ता और कर्म दोनों सिद्ध रहते हैं उनमें या तो कर्ता का लोप हो जाता है या उसे क्रिया के संपादक के रूप में व्यंजित न करके क्रिया के उपकरण के रूप में व्यक्त किया जाता है । जैसे –
1. शत्रु मारा गया।
2. मुझसे चाय नहीं पी जाती।
3. कमला को बुलाया गया।
कहा जाता है कि ….., सुना गया है कि ….. ।
पहले वाक्य में ‘तार्किक कर्ता‘ (जिसने शत्रु को मारा) का उल्लेख नहीं है । इसमें ‘शत्रु‘ ‘व्याकरणिक कर्ता‘ है क्योंकि क्रिया-व्यापार का प्रभाव उस पर पड़ता है । इसी तरह दूसरे वाक्य में ‘चाय‘ व्याकरणिक कर्ता है और ‘मैं‘ (से युक्त तिर्यक् रूप ‘मुझसे‘) तार्किक कर्ता । इन दोनों वाक्यों में कर्म (शत्रु और चायव्याकरणिक कर्ता, कर्तृकारक में है इसलिए क्रियापद (मारा गया, पी जाती) की अन्विति (वचन, लिंग और पुरुष) व्याकरणिक कर्ता से हुई है । तार्किक कर्ता-विहीन कर्मवाच्य रूप हिंदी में अधिक मिलते हैं । (उदाहरण-4)
कर्मवाच्य में मूलक्रिया के भूतकालिक कृदत रूप (उपर्युक्त उदाहरणों में – मारा, पी, बुलाया कहा, सुना) के साथ ‘जाना‘ क्रिया जुड़ती है । मुख्य क्रिया व्याकरणिक कर्ता (कर्म) के साथ वचन और लिंग से अन्वित होती है, जबकि ‘सहायक क्रिया‘ ‘पक्ष‘ ‘वृत्ति‘ और ‘काल‘ व्यक्त करती है।
हिंदी में कुछ क्रियाएं मूल रूप से कर्मवाच्य वाली हैं । जैसे – कटना, बंधना, बिकना, टूटना, खुलना, खिंचना, फूटना, लुटना आदि ।

question : what is passive voice in hindi define the term ?

answer : passive voice की हिंदी में डेफिनिशन अर्थात कर्मवाच्य, कर्मणि प्रयोग की परिभाषा ऊपर देखिये –